गुरुवार, 7 सितंबर 2017

बाज़ के पंख

तब एक बूढ़ा, एक युवा और उसकी दो पत्नियां, साथ में रहते थे ! युवा को अपने तीरों के लिये पंखों की ज़रूरत थी, उसे पता था कि दूर. ऊंचे पेड़ पर बाज़ का घोंसला हैं, वो वहां गया और पंख इकठ्ठा करने की गरज़ से पेड़ पर चढ़ने लगा, चूंकि बूढ़ा, युवा के प्रति जलन का भाव रखता था इसलिए उसने जादू से, पेड़ को बहुत ऊंचा कर दिया और पेड़ की छाल भी निकाल दी, जिसके कारण से पेड़ का तना बेहद चिकना हो गया ! युवा उस समय नग्न था अतः फिसलन भरे तने से होकर नीचे उतरना, उसके लिये असंभव हो गया था ! विवशतावश वो पेड़ के ऊपरी हिस्से में बना रहा और रात में अपने घर वापस नहीं लौट सका!उसकी अनुपस्थिति का लाभ उठा कर बूढ़े ने युवा की पत्नियों से कहा, हमें ये घर छोड़कर, कहीं और जाना होगा ! अगली सुबह वे सभी घर छोड़ कर निकल पड़े ! युवा की पत्नियों में से एक संतानहीन थी और उसे, बूढ़े का कहना मानने में कोई संकोच नहीं था किन्तु दूसरी पत्नि अपने शिशु को लेकर बूढ़े के साथ जाने के लिये तत्पर नहीं थी, खास कर तब, जबकि उसका पति पीछे छूट रहा हो !

अगली रात, दूसरी पत्नि ने बूढ़े से कुछ दूरी पर कैम्प बनाया और अलाव जलाकर अपने शिशु के साथ रुक गई जबकि निःसंतान पत्नि ने बूढ़े के साथ रात बिताई, अगले कई दिन और रात ऐसा ही होता रहा,इस दौरान युवा पेड़ के ऊपर ही अटका रहा ! उसके पास कपड़े नहीं थे इसलिए ठण्ड से बचने के लिये उसने अपने लंबे बालों से अपना तन ढांक लिया था, यही नहीं, उसने बाज़ के पंखों को भी अपने बालों में जहां तहां खोंस लिया था ताकि बालों और पंखों से, उसे कम्बल के जैसी सुरक्षा मिल जाए ! जिन छोटी चिड़ियों ने आस पास के पेड़ों की टहनियों पर घोंसले बनाए हुए थे, उन्होंने बहुत कोशिश की, कि युवा जैसे तैसे पेड़ के नीचे उतर सके पर...उनकी मदद युवा के किसी काम नहीं आई और वो बदस्तूर पेड़ पर अटका रहा ! अंततः एक दिन एक बूढ़ी स्त्री अपने दोनों हाथों में नुकीली छड़ी लिये हुए पेड़ के नीचे आई और पेड़ पर चढ़ने लगी ! वो युवक तक पहुंची और फिर मकड़ी में तब्दील हो गई, उसने ऊपर से नीचे तक जाल बुना, जिसकी सहायता से युवा धरती पर उतरने में सफल हुआ !

जब वो अपने घर पहुंचा तो उसने देखा कि घर उजाड़ पड़ा हुआ है, वहां उसे कुछ पद चिन्ह दिखाई दिये, जिनका पीछा करते हुए वो कई दिनों तक चलता रहा और फिर उसे अपनी दूसरी पत्नि और पुत्र दिखाई दिये ! बच्चा चिल्लाया, मेरे पिता, युवती ने कहा, लेकिन वो तो मर चुके हैं...तब तक युवा उनके निकट पहुंच चुका था ! पत्नि ने पति से पूरा अहवाल कहा ! उसने कहा कि बूढ़ा हम दोनों स्त्रियों को अपने साथ ले जाना चाहता था किन्तु मैं उसके साथ जाने के लिये इच्छुक नहीं थी इसलिए अलग ठहरी हुई हूं जबकि आपकी पहली पत्नि उस बूढ़े के साथ अगले कैम्प में ठहरी हुई है ! इसके बाद वो अपने पति को बड़ी सी टोकरी में छिपा कर बूढ़े के कैम्प तक पहुंची और उसने टोकरी अलाव के पास रख दी, जिसे बूढ़े ने हटा कर दूर रख दिया लेकिन वो, उसे फिर से अलाव के पास ले आई ! युवक तेजी से बाहर निकला और उसने बूढ़े तथा धोखेबाज़ पत्नि की हत्या कर दी, फिर अपनी सच्ची और अच्छी पत्नि के साथ शिशु को लेकर पुराने घर लौट आया, जहां वे सभी लंबे समय तक, सुखपूर्वक रहे !

इस आख्यान को बांचने से यह तो स्पष्ट नहीं होता कि बूढ़े और युवा के मध्य कोई रक्त सम्बन्ध था लेकिन उनके दरम्यान मौजूद किसी ना किसी प्रकार की स्वजनता की संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे दोनों एक साथ रहते थे ! उस युवा की दो पत्नियां थीं, जिनमे से एक निःसंतान थी जबकि बूढ़ा संभवतः परित्यक्त अथवा विधुर रहा होगा ! कहने का आशय यह है कि बूढ़ा व्यक्ति, स्त्री सानिध्य / यौन सुख से वंचित व्यक्ति माना जाएगा, जिसमें अनिवार्य, नैसर्गिक, दैहिक लालसायें शेष रह गई हों, इसी प्रकार से दूसरी पत्नि, निःसंतान रह जाने के कारण कदाचित स्वयं को उपेक्षित / पति साहचर्य से वंचित मानने लगी हो ! स्पष्ट ये कि उस समूह में दो व्यक्ति, निश्चित रूप से ऐसे थे जिन्हें दाम्पत्य जीवन से बाहर का यौनाकर्षण प्रभावित कर सकता था, एक वो बूढ़ा, जो कि विधुर अथवा परित्यक्त था और दूसरी निःसंतान स्त्री ! ये अनुश्रुति प्रत्यक्षतः यौनाकर्षण की बात नहीं करती, किन्तु परिस्थितिजन्य साक्ष्य कहते हैं कि बूढ़े का अनुसरण करना पहली पत्नि की कर्तव्य पारायणता या बुज़ुर्ग के प्रति आदर की अभिव्यक्ति नहीं था बल्कि उन दोनों का साथ, एक प्रकार से वंचित द्वय का सहज गठबंधन था !

कथा मोटे तौर पर यह घोषित करती है कि युवक आखेटक था, उसे बेहतर शिकार के लिये अपने तीरों को दुरुस्त रखना ज़रुरी था इसलिए परिंदों के पंख उसकी पहली प्राथमिकता थे जबकि काम सुख वंचित बूढ़े को इस अवसर की तलाश थी कि युवा घर से बाहर जाए और सुरक्षित घर वापस ना लौट सके ! प्रतीकात्मक रूप से जादू का उल्लेख कर, पेड़ की ऊंचाई बढ़ाने और पेड़ के तने से छाल उतार देने का कथन संभव है कि पूर्णतः असत्य हो ! लेकिन यह भी संभव है कि वो युवा स्वयं ही अपने हथियार को अधुनातन / मारक / घातक और अचूक बनाए रखने की लालसा के अंतर्गत, बेहद ऊंचे पेड़ पर जैसे तैसे चढ़ तो गया हो पर उतरते समय उसका हौसला पस्त हो गया हो और उसने, उसी ऊंचाई पर सुस्ताने का निर्णय लिया हो या फिर बूढ़े ने उसे ऐसा करने के लिये प्रेरित किया हो ताकि वह रात में उसकी अनुपस्थिति का फायदा उठा कर, उसकी दोनों पत्नियों को लेकर किसी अपरिचित स्थान की ओर पलायन कर जाए और घर वापसी के बाद युवा उन्हें ढूंढ ना सके, हालांकि दूसरी पत्नि के असहयोगी रवैय्ये के कारण से बूढ़े की योजना निष्फल हो गई !

युवा की पहली पत्नि, बूढ़े व्यक्ति के लिये पुत्रवधु तुल्य थी, उनमें आयु का वैषम्य था पर...कामुकता, नैतिकता की चेरी नहीं होती, वे दोनों परस्पर असमान होकर भी देह सुख गठबंधन धर्मी माने जायेंगे ! कथा कहती है कि दैहिकता कभी भी, किसी भी जगह या समय में सामाजिकता के तट बंध तोड़ सकती है ! उसके लिये सामाजिक मूल्य / आदर्श मायने नहीं रखते ! यौनिकता से इतर, उजाड़ पड़े घर से मिले पद चिन्हों का अनुसरण करते हुए पहली पत्नि और संतान से मिलन तथा व्यभिचार के आरोपियों / विश्वासघातियों को दण्डित करने के उपरान्त, युवा की घर वापसी की कहन में कोई नयापन नहीं है किन्तु पेड़ की ऊंचाई पर अटके हुए उस युवा की मददगार, नन्हीं चिड़ियों और मकड़ी के उल्लेख का सांकेतिक अर्थ यह भी हो सकता है कि प्रकृति, यौन नैतिकता / देह शुचिता के पक्ष में खड़ी हुई है ! दिलचस्प बात ये है कि बूढ़ी स्त्री के हाथों में नुकीली छड़ियां थीं यानि कि बुनाई करने वाली तीलियों के समान या चिकने पेड़ में सहजता से चढ़ने के उपकरण जैसी कोई वस्तु !

झुक कर चलने वाली बूढ़ी स्त्री और मकड़ी का सांकेतिक साम्य अद्भुत है, बूढ़ी स्त्री के  हाथ की नुकीली छड़ियां, मकड़ी के नुकीले पंजों के जैसी ! कह नहीं सकते कि वो मकड़ी का जाला था या फिर बूढ़ी स्त्री के द्वारा फेंकी गई रस्सी / रेशे निर्मित कोई संरचना, जिसकी सहायता से युवा, पेड़ से नीचे उतर पाया हो ! यह भी संभव है कि नुकीली टहनियों और छाल के रेशों की मदद से चिकने पेड़ से उतरने का प्रतीकात्मक सुझाव, बूढ़ी स्त्री / मकड़ी के द्वारा उस युवा को दिया गया हो / मिला हो ! ...हो सकता है कि इस कहानी में बूढ़ी स्त्री का उल्लेख, विश्वासघाती बूढ़े के प्रतिकार स्वरुप / स्त्री मददगार बतौर किया गया हो ! विशेष कर समाज में अच्छे बुरे के काउंटर बैलेंस / संतुलन के दृष्टिकोण को ध्यान में रख कर ! बहरहाल यह स्वीकार करने में कोई कठिनाई नहीं है कि कथाकालीन समाज आखेटक समाज था और वहां पर बहु-विवाह / बहु-स्त्री गामिता प्रचलन में थे, जिसके पश्चातवर्ती प्रभाव / परिणाम, कहे गये आख्यान का मूल आधार बन गये हैं !